संगीत क्या है ?
भारतीय संगीत मधुरता, लयबद्धता तथा विविधता के लिए जाना जाता है। वर्तमान समय में शास्त्रीय संगीत जिस रूप में हम सभी के समक्ष है,वह आधुनिक युग की प्रस्तुति नहीं है,बल्कि इसका इतिहास वैदिक काल से जुड़ा है,इसका उल्लेख अधिकतर सामवेद में देखने को अधिक मिलता है! सामवेद उन वैदिक ऋचाओं (अर्थात वैदिक श्लोक,मंत्र) का संग्रह मात्र है, जो गाये जाने योग्य है !प्राचीन काल से ही ईश्वर की आराधना हेतु भजनों के प्रयोग की परंपरा रही है! ध्यान देने की बात यह है की प्राचीन काल में अन्य कलाओं के समान भारतीय संगीत-कला भी धर्म से प्रभावित थी।
वास्तव में संगीत की उत्पत्ति धार्मिक प्रेरणा से ही हुई है, परन्तु धीरे-धीरे यह धर्म को विभाजित करते हुए लौकिक जीवन से जुड़ती गई, और इसी के साथ गायन-कला, वादन-कला एवंम नृत्य-कला के नए-नए रूपों का अविष्कार होता चला गया । कुछ समय पश्चात नाट्य-कला भी संगीत का हिस्सा बन गया, समय के साथ-साथ संगीत की विभिन्न धाराएँ विकसित होती गई, हमारा यह भारतीय संगीत अनेक महान-विभूतियों के योगदान के परिणाम स्वरूप ही इतना विशाल रूप धारण कर सका है!
भारतीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से जानी जाती है,वेदों का मूल मंत्र है:-
ॐ(ओ३म् ) इसमें तीन अक्षर सम्मिलित है, जो क्रमशः ब्रम्हा अर्थात सृष्टि-कर्ता, विष्णु अर्थात जगत-पालक,महेश अर्थात संहार-कर्ता की शक्तियों का समावेश है। इन तीनों अक्षरों को ऋग्वेद,सामवेद और यजुर्वेद से लिया गया है। संगीत के साथ स्वर षड्ज (सा),ऋषभ (रे),,गंधार (ग),मध्यम (म),पंचम (प),धैवत (ध), और निषाद (नी) से ही लिया गया है। साथ ही स्वर अर्थात शब्द की उत्पत्ति ओ३म् के गर्व से ही हुई है । मुख से उच्चारण शब्द ही संगीत में नाद का रूप धारण कर लेता है। इस प्रकार ॐ को ही संगीत का जगत कहा जाता है!
इसलिए कहा जाता है, जो साधक ॐ की साधना में समर्थ होता है,वही संगीत को यथार्त रूप से ग्रहण करता है।ॐ अर्थात सम्पूर्ण सृष्टि का एक अंश हमारी आत्मा में निहित है। और संगीत उसी आत्मा की आवाज़ है, अतः संगीत की उत्पत्ति हृदय-गत भावों में ही मानी जाती है। एतिहासिक दृष्टि से भारतीय संगीत की परम्परा प्राचीन काल से ही रही है,परन्तु वैज्ञानिक मतानुसार संगीत का प्रारंभ सिंधु-घाटी के काल में हुआ । हालांकि इस दावे का एक मात्र साक्ष्य है,उस समय की नृत्य-बाला की मुद्रा,नृत्य,नाटक और संगीत की देवी की पूजा का प्रचलन । सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के पश्चात ही वैदिक संगीत का प्रारंभ हुआ।
जिसमें संगीत की शैली में भजनों और मंत्रों के उच्चारण से पूजा अर्चना की जाती थी । इसके अतिरिक्त दो भारतीय महाकाव्यों (रामायण,महाभारत की रचना ) में भी संगीत का अधिक प्रभाव रहा । भारत मे सांस्कृतिक काल से लेकर आधुनिक युग तक आते-आते संगीत की शैली और पद्धति में जबरदस्त परिवर्तन हुआ। भारतीय संगीत के इतिहास के महान संगीतकार जैसे कि स्वामी हरि-दास,तानसेन,अमीर खुसरो आदि कलाकारों ने भारतीय संगीत की उन्नति में बहुत योगदान किया। जिसके कृति को पंडित रवि शंकर,भीमसेन गुरूराज जोशी,आदि महान संगीतकारों ने आज के युग में इसे कायम रखा है ।
भारतीय संगीत में यह माना गया है की संगीत के आदि प्रेरक शिव और सरस्वती है, इसका उद्देश्य यही जान पड़ता है की मानव इतनी उच्च कला को बिना की देवी प्रेरणा को केवल अपने दम पर विकसित नही कर सकता!
✍️Sushmita Jha


बेहतरीन व्यख्या की हो।
ReplyDeleteI Love music since my childhood, love this forever , , , , ����������
ReplyDeleteबहुत बढ़िया व्याख्या
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ReplyDeleteसंगीत केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं सुना जाता है। इसके कई सारे फायदे है।
ReplyDeleteSangeet sadhika hain aap, bahut sargarbhit jankari
ReplyDeleteभारतीय संगीत विरासत से रूबरू करा रही आप, धन्यवाद्😊
ReplyDeleteबहुत ही अच्छे तरीके से आपने संगीत की विशेषताओं का वर्णन किया हैं , सचमुच संगीत के बिना जीवन सुना है और शास्त्रीय संगीत के बिना संगीत का अलाप अधूरा हैं । इसी तरह लिखते रहिए और संगीत के बारीकियों को बताते रहिए । बहुत अच्छा ।
ReplyDeleteसंगीत की कला वैदिक काल से चली आ रही है संगीत के द्वारा इंसान अपने भाव को व्यक्त करता है।
ReplyDeleteभारतीय संस्कृत महान है
और आप भी क्योकि आप इस संस्कृति के प्रति लोगो को जागरूक कर रही है
जय भारत ��������
जय हिंद ��������
Your Art
ReplyDeleteIs not about how many people
Like your work
Your art is about if your heart like your work
If your soul like your works
It's about how honest
You are with yourself
And you must never
Trade honestly
For repeatability.
"Art is the highest form of hope"
बहुत ही अच्छा आपने व्याख्या किया है ।
ReplyDeleteआपको ढेर सारी शुभकामनाएं ।।
आपके Blog को खुब पढ़ा जाए यह प्रार्थना है ईश्वर से ।।
बहुत ही अच्छी व्याख्या की आपने संगीत की। हर इंसान को संगीत से लगाव होती है। संगीत केवल मनोरंजन के लिए नहीं होती है।शोध के अनुसार संगीत से लोगों को depression से लड़ने की ताकत भी मिलती है एवं संगीत से वो मानसिक रूप से खुश भी होते हैं। 🎧🎧🎷🎺🎸🎻🎼🎼🎼🎼🎹
ReplyDeleteशास्त्रीय संगीत को हम जिस रूप में देखेंगे उसी रूप में हमें यह देखने को मिलेगा जैसे:-चाहे गणित हो या साइंस ,या इतिहास या भूगोल इत्यादि सभी मे इनका सामंजस्य स्थापित है ,आज आधुनिक युग में इसे समझने और अपने जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है!
ReplyDeleteबहुत बढ़िया पोस्ट����
अद्भुत,संगीत के प्रति आपका ज्ञान अनुकरणीय है ।
ReplyDeleteAnimation your job.
ReplyDeleteBahut bdhiya
ReplyDeleteSangeet sirf entertainment ke liye nahi ha, iska bahut sara fayda ha jo aap ne likha ha
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